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RBSE 12th Hindi Literature Model Paper Solution कक्षा 12वीं हिंदी साहित्य मॉडल पेपर का हल यहां से डाउनलोड करें

RBSE 12th Hindi Literature Model Paper Solution: राजस्थान बोर्ड द्वारा वर्ष 2024 के लिए जारी किए गए12वीं कक्षा के हिंदी साहित्य मॉडल पेपर का पूरा सॉल्यूशन उपलब्ध करवाया गया है। साथ ही एग्जाम पैटर्न की जानकारी भी उपलब्ध करवाई गई है इसलिए आर्टिकल को अंदर तक जरूर पढ़ें।

RBSE 12th Hindi Literature Model Paper Solution

कक्षा 12 वीं के हिंदी साहित्य बोर्ड पेपर में आपको 3 घंटे 15 मिनट का समय दिया जाएगा। हिंदी साहित्य के प्रश्न पत्र का पूर्णांक 80 रहेगा। इसमें आपको नीचे दिए गए विषय से प्रश्न, इतने अंकों के साथ आएंगे:

क्या है आर्टिकल में

  • अपठित: 12 अंक
  • रचनात्मक एवं व्यवहारिक लेखन (निबंध): 6 अंक
  • अभिव्यक्ति और माध्यम: 10 अंक 
  • काव्यांग परिचय: 8 अंक
  • पाठ्य पुस्तक अंतरा, भाग-2: 32 अंक
  • पाठ्य पुस्तक अंतराल, भाग-2: 12 अंक

1. वस्तुनिष्ठ प्रश्न 

  • ‘बालक बच गया’ अध्याय में बालक ने इनाम में क्या मांगा ?
    • पुस्तक
    • मानचित्र
    • चश्मा
    • लड्डू
  • संवदिया कहानी किस प्रकार की कहानी है?
    • आंचलिक
    • ऐतिहासिक
    • अकहानी
    • राजनैतिक
  • ‘मैंने देखा, एक बूंद’ कविता में कवि ने बूंद की किस विशेषता को बताया है ?
    • क्षणभंगुरता
    • चमक
    • तरलता
    • सजलता
  • ‘बारहमासा’ जायसी की किस रचना का अंश है ?
    • अखरावट
    • पद्मावत
    • आखिरी कलाम
    • पृथ्वीराज
  • ‘सूरदास की झोपड़ी’ में किस वर्ग की व्यथा का अंकन किया गया है ?
    • दलित व शोषित वर्ग
    • उच्च वर्ग
    • मध्यम मार्ग
    • उच्च मध्यम वर्ग
  • ‘अपना मालवा’ पाठ किस समस्या की और इंगित करता है ?
    • जल एवं पर्यावरण
    • महंगाई
    • बेरोजगारी
    • महामारी
  • कमल-पत्र को कहते हैं ?
    • भसीन
    • पुरइन
    • कमल गट्टा
    • कमल नाल
  • ‘डग-डगरो टी,पग-पग नीर’ किस धरती को कहा गया है ?
    • मालवा
    • मेवाड़
    • हाडोती
    • मेवात
  • नाटक का सबसे जरूरी और सशक्त अंग है, जिसके माध्यम से कथा की गति बनी रहती है-
    • कविता
    • गीत
    • संवाद
    • इनमें से कोई नहीं
  • समाचार लेखन के ककार होते हैं-
    • चार
    • पांच
    • छ:
    • आठ
  • किसी अखबार की अपनी आवाज किसे माना जाता है ?
    • संपादकीय
    • आलेख
    • पत्रकार
    • समाचार
  • संवाददाताओं के बीच काम के विभाजन को मीडिया की भाषा में रहते हैं-
    • डेस्क
    • बीट
    • फ्रीलांस
    • न्यूज़ वेग

2. रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए

  • काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्व अलंकार कहलाते हैं।
  • रोला व उल्लाला छंद के योग से छप्पय छंद बनता है।
  • ऐसी काव्य रचना जिसे पढ़ते ही अर्थ ग्रहण हो जाए वह प्रसाद गुण से युक्त रचना मानी जाती है।
  • जब कारण नहीं होने पर भी कार्य हो वहां विभावना अलंकार होता है।
  • ‘सागर के उर पर नाच-नाच लहरें करती है मधुर-गान’ पंक्ति में उत्प्रेक्षा अलंकार है।
  • तीन वर्णों का एक गण होता है।

3. अपठित गद्यांश के प्रश्नों का उत्तर दें

भारतीय भाषाओं और साहित्य में अग्रस्थान ग्रहण करने का हिन्दी ने आग्रह नही किया। यह इन सबकी संयोजक शक्ति के रूप में बनी रहना चाहती है। हिन्दी का यह विनय हिन्दी के दीन-भाव के कारण नहीं है। अब वह समय आ गया है जब हम हिन्दी की संतानों को क्षमा प्रार्थना के स्वर में नहीं, सत्य स्थापना के स्वर में यह दृढ़तापूर्वक कहना चाहिये कि राज-भाषा होने के लिये हिन्दी अब अपने को अपमानजनक शर्तो पर बेचने को तैयार नहीं है राज-भाषा का पद हिन्दी के लिये बहुत छोटा पद है। हिन्दी का साहित्यकार हमेशा से तेज का उपासक रहा है वह तेज चाहे छोटे से छोटे आदमी में है।

i) हिन्दी भाषा का साहित्यकार किसका उपासक रहा है ?

Ans- हिन्दी भाषा का साहित्यकार तेज का उपासक रहा है।

ii) हिन्दी भाषा में कौनसा भाव बतलाया गया हैं ?

Ans- हिन्दी भाषा में विनय और आत्मसम्मान का भाव बतलाया गया है।

iii) हिन्दी भाषियों को किस स्वर में बोलने हेतु कवि प्रेरित कर रहा है ?

Ans- हिंदी भाषियों को सत्य स्थापना के स्वर में बोलने हेतु कवि प्रेरित कर रहा है।

iv) कौनसा पद हिन्दी के लिये छोटा माना है ?

Ans- राज-भाषा का पद हिंदी के लोए छोटा माना है।

v) हिन्दी भाषा किस रूप में बनी रहना चाहती है?

Ans- हिंदी भाषा संयोजक शक्ति के रूप में बनी रहना चाहती है ।

vi) प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिये।

Ans- प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक “हिंदी भाषा का आत्मसम्मान” है।

4. अपठित पद्यांश को पढ़कर उत्तर दें

वर्षों तक वन में घूम-घूम,

बाघा विध्नों को चूम-चूम,

सह धूप-घाम,पानी-पत्थर,

पाण्डव आये कुछ और निखर।

सौभाग्य न सब दिन सोता है,

देखें आगे क्या होता है

मैत्री की राह बताने को,

सबको सुमार्ग पर लाने को,

दुर्योधन को समझाने को,

भगवान हस्तिनापुर आये,

पाँडव का संदेसा लाये।

i) श्री कृष्ण हस्तिनापुर क्या संदेश लेकर गए थे ?

Ans- श्री कृष्ण हस्तिनापुर पहुंचे पाण्डवों के पक्ष में संदेश लेकर, जिसमें उन्होंने दुर्योधन से कहा कि पाण्डव अपना न्यायपूर्ण हिस्सा चाहते हैं और यदि वह नहीं मिलेगा तो युद्ध होगा।

(ii) किसको समझाने के लिए भगवान हस्तिनापुर आये ? बताइये

Ans- श्री कृष्ण ने हस्तिनापुर गए ताकि वे दुर्योधन को समझा सकें। उन्होंने दुर्योधन से कहा कि पाण्डव उसके भाई हैं और सभी को साथ मिलकर रहना चाहिए।

iii) “सौभाग्य न सब दिन सोता है” पंक्ति का अर्थ बताइये।

Ans- “सौभाग्य न सब दिन सोता है” का अर्थ है कि सौभाग्य हमेशा सुला हुआ नहीं रहता, और कभी-कभी कठिनाईयों के बाद भी सौभाग्य आता है।

iv) पाँडवो ने वन में कौन-कौन से कष्ट सहन किये थे ?

Ans- पाण्डवों ने वन में बहुत कष्ट झेले, जैसे कि जंगल में रहना, वन्यजनों से डरना, और भूखे रहना।

v) कृष्ण के हस्तिनापुर जाने का क्या उद्देश्य था ?

Ans- कृष्ण का हस्तिनापुर जाने का उद्देश्य था दुर्योधन को समझाना और उसे सहमति दिलाना कि पाण्डवों को उनका अधिकार मिलना चाहिए।

vi) प्रस्तुत पद्यांश के लिये उचित शीर्षक लिखिये।

Ans- उपस्थित पद्यांश के लिए उचित शीर्षक “कृष्ण का हस्तिनापुर संदेश” हो सकता है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अधिकतम 40 शब्दों में दीजिये।

5. लेखक ने सेवाग्राम में किन-किन देशभक्तों को देखा था ?

लेखक ने सेवाग्राम में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सुभाष चंद्र बोस, एवं अन्य स्वतंत्रता सेनानियों को देखा था।

6. सिंगरौली के लिये लेखक ने “बैकुण्ठ” एवं “कालापानी” की उपमा क्यों दी हैं ?

सिंगरौली को लेखक ने “बैकुण्ठ” की उपमा इसलिए दी है क्योंकि यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य अद्भुत है। इसे “कालापानी” की उपमा इसलिए दी है क्योंकि यहाँ के लोग गरीबी और अभाव में जीते हैं।

7. विद्यापति की नायिका प्रेम के अनुभव का वर्णन करने में असमर्थता क्यों व्यक्त करती है ?

विद्यापति की नायिका प्रेम के अनुभव का वर्णन करने में असमर्थता इसलिए व्यक्त करती है क्योंकि प्रेम एक ऐसा अनुभव है जो शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।

8. ‘दिशा’ कविता में बच्चे ने हिमालय को पतंग की दिशा में क्यों बताया ?

‘दिशा’ कविता में बच्चे ने हिमालय को पतंग की दिशा में इसलिए बताया है क्योंकि वह पतंग को उड़ाते हुए हिमालय की ओर देख रहा था।

9. बिस्कोहर में लेखक ने किन-किन साँपों के बारे में बताया है ?

बिस्कोहर में लेखक ने निम्नलिखित साँपों के बारे में बताया है:

  • कोबरा
  • करैत
  • बिच्छू
  • सांप

10. झोंपड़ी जल जाने के बाद भी सूरदास को क्या आशा थी ?

झोंपड़ी जल जाने के बाद भी सूरदास को यह आशा थी कि भगवान कृष्ण उसकी झोंपड़ी को फिर से बना देंगे।

11. अन्योक्ति अलंकार की परिभाषा व उदाहरण लिखिये।

अन्योक्ति अलंकार में किसी वस्तु या व्यक्ति की तुलना किसी अन्य वस्तु या व्यक्ति से की जाती है, जिसका अर्थ उससे भिन्न होता है।

उदाहरण:

  • “मोती भी क्या है, काँच के टुकड़े हैं।”
  • “वह तो समुद्र है, नदी नहीं।”

12. किसी भी कहानी के विस्तार के लिये द्वन्द्व क्यों महत्वपूर्ण है ?

किसी भी कहानी के विस्तार के लिए द्वन्द्व महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कहानी में रोमांच और तनाव पैदा करता है।

13. ‘इन डेप्थ’ रिपोर्ट क्या होती है ?

‘इन डेप्थ’ रिपोर्ट वह रिपोर्ट होती है जो किसी विषय का गहराई से अध्ययन करती है और उसके सभी पहलुओं को उजागर करती है।

14. आर्थिक पत्रकारिता सामान्य पत्रकारिता की तुलना में जटिल क्यों होती है ?

आर्थिक पत्रकारिता सामान्य पत्रकारिता की तुलना में जटिल होती है क्योंकि इसमें आर्थिक सिद्धांतों और अवधारणाओं का ज्ञान होना आवश्यक होता है।

15. आचार्य राम चन्द्र शुक्ल का साहित्यिक परिचय दीजिये।

आचार्य राम चंद्र शुक्ल हिंदी साहित्य के एक प्रसिद्ध विद्वान और आलोचक थे। उन्होंने हिंदी साहित्य के इतिहास, आलोचना और साहित्यिक सिद्धांतों पर कई महत्वपूर्ण रचनाएँ लिखीं।

16. घनानन्द का साहित्यिक परिचय दीजिये।

घनानंद हिंदी साहित्य के एक प्रसिद्ध भक्ति कवि थे। उन्होंने अपने काव्य में प्रेम, विरह, और भक्ति के भावों को अत्यंत मार्मिक ढंग से व्यक्त किया है।

खण्ड – स

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न : (उत्तर शब्द सीमा लगभग 60 शब्द)

17. ‘आज मनुष्य का प्रकृति से रिश्ता टूट गया है’ ‘बसंत आया’ कविता के आधार पर अपने शब्दों में लिखिये ?

आज मानव-प्रकृति के बीच संबंध टूटे हुए हैं, जो ‘बसंत आया’ कविता में स्पष्ट होता है। कवि का कहना है कि आज मानव समझना प्रकृति में समाहित सौंदर्य और महत्ता को भूल गया है। उसने प्रकृति को केवल अपने स्वार्थ के लिए एक साधन माना है, जिससे उसे प्रदूषित करने और नष्ट करने का अधिकार महसूस हो रहा है।

कविता में यह भी कहा गया है कि प्रकृति और मानव एक दूसरे के पूरक हैं, प्रकृति मानव को जीवन देती है और मानव प्रकृति का संरक्षण करता है, लेकिन आजकल मानव ने इस सांगत्रासित रिश्ते को तोड़ दिया है।

मानव-प्रकृति के रिश्ते के टूटने के पीछे कई कारण हैं, जिनमें से एक है अग्रणीता और विकास की भागदौड़। मानव अधिक से अधिक धन और संपत्ति कमाना चाहता है, जिसके लिए वह प्रकृति को शोषण कर रहा है।

दूसरा कारण है जनसंख्या वृद्धि, जिसके कारण प्रकृति पर दबाव बढ़ गया है। मानव को जगह और भोजन की आवश्यकता है, और इसके लिए वह प्रकृति का अत्यधिक उपयोग कर रहा है।

तीसरा कारण है प्रदूषण, जिससे प्रकृति को बहुत नुकसान हुआ है। वायु, जल, और भूमि प्रदूषण से प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया है।

आज, हमें यह सुनिश्चित करना है कि हम प्रकृति के साथ अपने संबंधों को सुधारें। हमें प्रकृति का संरक्षण करना चाहिए और उसे बचाने के लिए प्रयास करना चाहिए। हमें प्रकृति के प्रति जागरूक होना चाहिए और उसके साथ सहयोगी रहने के लिए प्रयासशील रहना चाहिए।

अथवा

‘कार्नेलिया का गीत’ कविता के मूल कथ्य को अपने शब्दों में लिखिए।

‘कार्नेलिया का गीत’ में, जयशंकर प्रसाद ने भारतीय सांस्कृतिक और प्राकृतिक समृद्धि का सुंदर वर्णन किया है। कविता की मुख्य पात्रिका, कार्नेलिया, विदेशी महिला, भारत की यात्रा पर आती है और यहां उसे भारतीय प्राकृतिक सौंदर्य, संस्कृति, और लोगों के प्रति आघात होता है। उसकी नजर में, भारत एक प्रेम, दया, और सहानुभूति का स्वर्ग है।

कविता में कार्नेलिया ने भारत की सूर्योदय की सुंदरता, उसके समृद्ध इतिहास और संस्कृति, और अतिथि-सत्कारी लोगों की सराहना की है। उसकी आंखों से भारत एक ऐसा स्वर्ग दिखता है जो सभी के लिए खुला है, चाहे वे कहाँ से भी हों, जाति या धर्म से जुड़े हों या नहीं।

कविता का मूल कथ्य है कि भारत एक ऐसा देश है जो प्रेम, सद्भाव, और संस्कृति का प्रतीक है, एक साथी और सुरक्षित घर जो सभी को आपने महसूस करने का एक अद्वितीय अनुभव प्रदान करता है।

18. ‘घड़ी के पुर्जे कहानी की मूल संवेदना को समझाइए।

“घड़ी के पुर्जे” कहानी में, मूल संवेदना यह है कि जीवन में सभी घटक समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। कहानी में, घड़ी के छोटे-छोटे पुर्जे भी घड़ी के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बिना इन पुर्जों के घड़ी काम नहीं कर सकती।

कहानी में, यशोधर बाबू एक पुराने जमाने के व्यक्ति हैं जो पुराने ज़माने की घड़ियों को पसंद करते हैं। उनके पास एक पुरानी घड़ी है जो खराब हो गई है। वह घड़ी ठीक करवाने के लिए एक घड़ीसाज़ के पास जाते हैं। घड़ीसाज़ घड़ी को खोलकर देखता है और उसे पता चलता है कि घड़ी खराब होने के पीछे एक छोटा सा पुर्जा है। वह पुर्जा बदल देता है और घड़ी फिर से चलने लगती है।

यह कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में सभी घटक समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। चाहे वे छोटे हों या बड़े, सभी घटक एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और एक-दूसरे पर निर्भर हैं। बिना किसी एक घटक के, जीवन अधूरा है। कहानी की इस मूल संवेदना को निम्नलिखित उदाहरणों से स्पष्ट किया जा सकता है:

1. घड़ी के पुर्जे की तरह, समाज में सभी लोग समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। चाहे वे अमीर हों या गरीब, शिक्षित हों या अशिक्षित, सभी लोगों का समाज में अपना योगदान होता है।

2. घड़ी के पुर्जे की तरह, प्रकृति में सभी घटक समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। चाहे वे बड़े हों या छोटे, सभी घटक एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और एक-दूसरे पर निर्भर हैं।

“घड़ी के पुर्जे” कहानी एक प्रेरणादायक कहानी है जो हमें सिखाती है कि जीवन में सभी घटक समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

अथवा

‘भीड़ लड़के ने दिल्ली में भी देखी थी, लेकिन इस भीड़ का अंदाज निराला था’। ‘दूसरा देवदास’ कहानी के आधार पर दिल्ली और गंगा-तट की भीड़ का अन्तर बताइये।

“दूसरा देवदास” कहानी में, लड़का दिल्ली में भीड़ देख चुका था। लेकिन गंगा-तट की भीड़ का अंदाज निराला था। दिल्ली की भीड़ में लोग व्यस्त और जल्दबाजी में रहते हैं। वे अपने कामों से जूझ रहे होते हैं और दूसरों से बहुत कम ध्यान देते हैं। लेकिन गंगा-तट की भीड़ में लोग शांत और सुकून में रहते हैं। वे गंगा के किनारे बैठकर प्रकृति का आनंद लेते हैं और एक-दूसरे से बातचीत करते हैं।

दिल्ली की भीड़ में लोग एक-दूसरे से दूरी बनाकर रखते हैं। वे एक-दूसरे के साथ बातचीत करने में संकोच करते हैं। लेकिन गंगा-तट की भीड़ में लोग एक-दूसरे के करीब होते हैं। वे एक-दूसरे से बातचीत करते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं।

दिल्ली की भीड़ में लोग अक्सर उदास और परेशान दिखाई देते हैं। वे अपने कामों से तनावग्रस्त होते हैं। लेकिन गंगा-तट की भीड़ में लोग अक्सर खुश और प्रसन्न दिखाई देते हैं। वे गंगा के किनारे बैठकर प्रकृति का आनंद लेते हैं और अपने दुखों को भूल जाते हैं। दिल्ली और गंगा-तट की भीड़ में निम्नलिखित अंतर हैं:

1. दिल्ली की भीड़ व्यस्त और जल्दबाजी में रहती है, जबकि गंगा-तट की भीड़ शांत और सुकून में रहती है।

2. दिल्ली की भीड़ में लोग एक-दूसरे से दूरी बनाकर रखते हैं, जबकि गंगा-तट की भीड़ में लोग एक-दूसरे के करीब होते हैं।

3. दिल्ली की भीड़ में लोग अक्सर उदास और परेशान दिखाई देते हैं, जबकि गंगा-तट की भीड़ में लोग अक्सर खुश और प्रसन्न दिखाई देते हैं।

19. “नदियों का सदानीरा रहना जीवन के स्रोत का सदैव जीवित रहना है” कथन के समर्थन में अपने विचार लिखिये। शब्द सीमा 80-100 शब्द

नदियों का सदानीरा रहना जीवन के स्रोत का सदैव जीवित रहना है। यह कथन पूर्ण रूप से सत्य है। नदियाँ जीवन के स्रोत हैं, जो जल, पोषक तत्वों, और अन्य प्राकृतिक संसाधनों को प्रदान करती हैं। नदियों के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

नदियाँ जल का प्रमुख स्रोत हैं, जो मानव, पशु, और अन्य जीवों के लिए पीने, सिंचाई, और अन्य उपयोगों के लिए जल प्रदान करती हैं। नदियाएं जलवायु को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और वर्षा और सूखे को संतुलित रखने में मदद करती हैं।

नदियाएं पोषक तत्वों का महत्वपूर्ण स्रोत भी हैं, जो मिट्टी में पोषक तत्वों को जमा करती हैं और उन्हें समुद्र में पहुंचाती हैं। इनमें विविध जीवों के लिए आवास का स्थान बनता है, विशेषकर मछलियों और अन्य जलीय जीवों के लिए।

नदियों का सदानीरा रहना जीवन के स्रोत के सदैव जीवित रहने के लिए आवश्यक है। हमें नदियों को प्रदूषण से बचाने और उन्हें संरक्षित करने के लिए सहयोग करना चाहिए। इसे सुनिश्चित करने के लिए:

1. अपने घरों, व्यापारों और कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट को सीधे नदियों में नहीं छोड़ना चाहिए।

2. नदियों में कचरा नहीं फेंकना चाहिए।

3. नदियों के किनारे पेड़ लगाने चाहिए ताकि वे प्रदूषण को रोकने में मदद कर सकें।

4. लोगों को नदियों के महत्व के बारे में जागरूक करना चाहिए ताकि वे उन्हें संरक्षित करने के लिए प्रयास करें।

अथवा

“सूरदास की झोंपड़ी” पाठ के आधार पर सूरदास के व्यक्तित्व पर अपने विचार लिखिये।

सूरदास की झोंपड़ी पाठ के आधार पर सूरदास के व्यक्तित्व का विचार करते हुए कहा जा सकता है कि वह एक साधारण, सात्विक, दयालु और भक्तिभावी व्यक्ति थे।

सूरदास की साधारणता उनके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा था। वे एक गरीब परिवार में पैदा हुए थे और एक झोंपड़ी में रहते थे। लेकिन इसके बावजूद, उन्होंने कभी अपनी साधारणता को नहीं भूली। उन्होंने हमेशा दूसरों की सहायता करने के लिए तैयार रहे और कभी भी किसी से भेदभाव नहीं किया।

सूरदास की सात्विकता भी एक महत्वपूर्ण विशेषता थी। वे भगवान कृष्ण के परम भक्त थे और हमेशा उनका ध्यान करते थे। उनके भजनों में भगवान कृष्ण के प्रति उनकी गहरी भक्ति और प्रेम प्रकट होता था।

उनकी दयालुता भी उनके व्यक्तित्व का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलु थी। वे हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहते थे और गरीबों, असहायों, और पीड़ितों की सहायता करते थे। उन्होंने हमेशा दूसरों को खुश करने के लिए प्रयास किया।

भक्तिभाव सूरदास के व्यक्तित्व का सबसे महत्वपूर्ण गुण था। वे भगवान कृष्ण के परम भक्त थे और हमेशा उनका ध्यान करते थे। उनके भजनों में भगवान कृष्ण के प्रति उनकी गहरी भक्ति और प्रेम प्रकट होता था। सूरदास एक महान कवि और एक आदर्श व्यक्ति थे, जिनका व्यक्तित्व हमें प्रेरणा देता है।

22. किसी एक विषय पर 400 शब्द में निबंध लिखें

  • आत्मनिर्भर भारत
  • आतंकवाद एक वैश्विक समस्या
  • वर्तमान शिक्षा प्रणाली एवं नैतिक शिक्षा
  • मेरा प्रिय कवि

परिचय: आतंकवाद और उसका परिचय

आतंकवाद एक विश्वव्यापी समस्या है, जिसने विभिन्न देशों को अपने असर में ले रखा है। इस निबंध में, हम आतंकवाद की वैश्विक परिस्थिति, उसके कारण और समाधान पर चर्चा करेंगे।

आतंकवाद का कारण: एक विश्लेषण

आतंकवाद का कारण विभिन्न हो सकता है, जैसे कि धार्मिक तात्त्विकता, आर्थिक असमानता, राजनीतिक विरोध या सामाजिक असुरक्षा। आतंकवादियों का उद्दीपन यहाँ होता है और वे अपने उद्देश्य को हासिल करने के लिए हिंसा का सहारा लेते हैं।

आतंकवाद का प्रभाव: समाज और आर्थिक आहति

आतंकवाद का सीधा प्रभाव समाज पर होता है, जिससे लोगों के बीच भ्रष्टाचार और भय की भावना बढ़ती है। इसके चलते आर्थिक आहति होती है, जिससे देश की विकास गति रुक जाती है।

आतंकवाद के समाधान: संघर्ष और सहयोग

आतंकवाद के समाधान के लिए देशों को मिलकर काम करना होगा। सुरक्षा तंत्रों को मजबूती प्रदान करने, गरीबी की समस्या से निपटने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के माध्यमों का समर्थन करना आवश्यक है।

आतंकवाद का वैश्विक संघर्ष: संयुक्त प्रयास की आवश्यकता

विश्वभर में सहयोग और संयुक्त प्रयास की आवश्यकता है ताकि आतंकवाद का सामना किया जा सके। एक सशक्त और संगठित समुदाय के रूप में हमें मिलकर इस समस्या का सामना करना होगा।

समापन: आतंकवाद से मुक्ति की दिशा

आतंकवाद एक गंभीर समस्या है, जिसका समाधान व्यापक सहयोग और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से हो सकता है। हमें आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष करने और समृद्धि की दिशा में बढ़ने के लिए सकारात्मक योजनाएं बनानी चाहिए।

RBSE 12th Hindi Literature Model Paper Solution

RBSE 12th Hindi Literature Model Paper

निष्कर्ष

हमारे द्वारा हिंदी साहित्य के सभी प्रश्नो का उत्तर नहीं बताया गया है, इनमे 20 और 21 नंबर प्रश्न का उत्तर नहीं दिया है। उन प्रश्नो की व्याख्या स्वयं करें। सभी उत्तरों की जाँच एक बार अवश्य कर लें। हमने अथवा के उत्तर भी दिए है, लेकिन परीक्षा में आपको केवल एक प्रश्न ही हल करना है।