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बांगलादेश पर एक भौगोलिक निबन्ध लिखिए तथा देश को प्राकृतिक प्रदेशों में विभाजित कीजिए

बांगलादेश का जन्म 16 दिसम्बर, 1971 ई. को हुआ। इससे पहले यह पाकिस्तान का एक हिस्सा था जिसे पूर्वी पाकिस्तान नाम दिया गया था। यह 21° और 27° उत्तरी अक्षांशों के मध्य कर्क रेखा पर स्थित है। इसका क्षेत्रफल 1,47,570 वर्ग किमी. है और जनसंख्या लगभग 16.64 करोड़ है। यह तीन दिशाओं से भारत द्वारा घिरा है, दक्षिण-पूर्व में देश की कुछ सीमा बर्मा (म्यांमार) को स्पर्श करती है।बंगलादेश भारत के उपमहाद्वीप में ऐसे स्थान पर स्थित है जहाँ गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियाँ अपने मुहाने बंगाल की खाड़ी में बनाती हैं,

इसलिए यहाँ नदियों द्वारा निक्षिप्त जलोढ़ मैदान अधिक महत्त्वपूर्ण हैं। देश के पूर्वी व दक्षिणी-पूर्वी भाग में केवल कुछ क्षेत्रफल पर पहाड़ियाँ पायी जाती हैं। यह पहाड़ियाँ सिलहट और चिटगाँव जिले में 200 या 300 मी. ऊंची हैं, केवल शिखर ही 1,000 मी. से ऊँचे हैं। इस प्रकार बांगलादेश की भू-पृष्ठीय बनावट में नवीन कुछ जलोढ़ मैदान, प्राचीन जलोढ़ मैदान और साधारण ऊँची सीमांत पहाड़ियों का स्थान है। नदियों के मुहानों के निकट सुन्दर वन और मोरीबन्द डेल्टा भी उल्लेखनीय हैं।

बांगलादेश पर एक भौगोलिक निबन्ध लिखिए तथा देश को प्राकृतिक प्रदेशों में विभाजित कीजिए

जलवायु

इस देश में सामान्य आर्द्र मानसूनी जलवायु पायी जाती है। अत्यधिक तापमान अप्रैल माह में अनुभव किया जाता है। आमतौर पर ग्रीष्मकाल में 33° से 36° से प्रे. के मध्य तापमान पाया जाता है। इस प्रकार अप्रैल और मई अधिक गर्म हैं, जून से अगस्त तक तापमान घट जाता है, जबकि यहाँ वर्षा अधिक होती है। दोबारा सितम्बर और अक्टूबर माह में तापमान बढ़ जाता है। शीतकाल के समय ताप लगभग 21° से प्रे. पाया जाता है, शीतकाल नवम्बर से मध्य फरवरी तक होता है, कुछ समय के लिए ताप अवश्य 10° से.प्रे. के निकट पाया जाता है।

इस देश में वर्षा ग्रीष्मकाल से सम्बन्धित है, जिस समय बंगाल की खाड़ी की मानसून गंगा और ब्रह्मपुत्र की घाटी में प्रवेश करती है। मार्च और मई के मध्यकाल में काल बैसाखी द्वारा कुछ वर्षा होती है। प्रधान रूप से वर्षा जून से सितम्बर तक होती है, देश के पश्चिमी भाग में वर्षा कम और पूर्वी भाग में वर्षा अधिक पायी जाती है। इस प्रकार राजशाही और कुस्तिया नामक जिलों में वर्षा का औसत 150 सेमी. और सिलहट तथा चटगाँव जिलों में 350 से 500 सेमी. तक वर्षा होती है। देश में आर्द्रता वर्ष भर अधिक रहती है।

मिट्टियाँ

बांग्लादेश की मिट्टियों पर भू-पृष्ठीय बनावट और जलवायु का प्रभाव अधिक पाया जाता है। यहाँ की मिट्टियों पर नदियों द्वारा निक्षेप का भी विशेष महत्त्व है। देश की मिट्टियों का वर्गीकरण निम्नलिखित प्रकार किया गया है-

(1) खादर की मिट्टियाँ – यह मिट्टियाँ देश के मध्यवर्ती भाग में नदी घाटियों के किनारे पायी जाती हैं, इनमें बालू की मात्रा अधिक होती है।

(2) लाल बाँगर मिट्टियाँ-यह प्राचीन जलोढ़ मिट्टियाँ हैं, जो देश के उत्तर-पश्चिम एवं मध्यवर्ती भाग में पायी जाती है। बाड़िन्द, मधुपुर और लाल मई क्षेत्र इस प्रकार की मिट्टियों के लिए उल्लेखनीय हैं। मिट्टी का रंग लाल लोहांश की अधिकता के कारण पाया जाता है।

(3) बलुई दोमट तथा चीका दोमट यह मिट्टियाँ – बाढ़ग्रस्त क्षेत्र से हटकर समतल मैदानों में पायी जाती है। देश के उत्तरी भाग में बलुई दोमट और दक्षिणी भाग में चीका दोमट की प्रधानता है। इनका स्थानीय नाम दोआस है।

(4) चीका या मटियाल मिट्टी-यह मिट्टी बील या दलदली क्षेत्रों के निकट पायी जाती है, जिसमें जल धारण करने की क्षमता अधिक है। वर्षाकाल में यह चिपचिपी और शुष्क मौसम में कठोर बन जाती है, इसका स्थानीय नाम मटियाल है।

(5) दलदलीय क्षेत्रीय मिट्टी-यह डेल्टाओं के निकट दलदली क्षेत्रों में पायी जाती है, इसे पीट नाम से भी सम्बोधित किया जाता है। इसमें जीवांश और जल की मात्रा अधिक होती है।

(6) नुनखरी मिट्टियाँ-यह मिट्टियाँ भी डेल्टा के निकट पायी जाती हैं। इनमें नमक की मात्रा समुद्री जल से प्राप्त होती है। इनका स्थानीय नाम नोना है, यह कृषि के लिए उपयोगी नहीं। होती ।

(7) तटवर्तीीं बलुई मिट्टियाँ-यह समुद्र के तट पर पायी जाती हैं, जहाँ बालू की मात्रा अधिक होती है। इनका स्थानीय नाम बाली है।

(8) पहाड़ी क्षेत्रीय मिट्टियाँ-यह दक्षिणी सिलहट तथा चटगाँव क्षेत्रों में पायी जाती हैं इनका निर्माण शैल और बलुआ पत्थर से हुआ है, मिट्टियों की गहराई कम होती है इसलिए कृषि में इनका उपयोग कम है।

भूमि उपयोग बंगलादेश में बन के अन्तर्गत क्षेत्र कुल क्षेत्रफल का 14 प्रतिशत है। वन घटगाँव जिला एवं पहाड़ी क्षेत्र, दक्षिणी खुलना, उत्तरी व दक्षिणी सिलहट तथा ढाका व मैमनसिंह जिलों में पाये जाते हैं। अधिक वर्षा के क्षेत्रों में चपलास, तेलसुर और पितराज नामक सदाहरित वृक्ष तथा कम वर्षा के क्षेत्रों में गर्जन, तून और बाँस नामक पर्णपाती वृक्ष पाये जाते हैं। इस देश में वनों का महत्त्व डेल्टाई भागों में उल्लेखनीय है। यहाँ के वृक्ष सुन्दरी, गोरन, गैंग्वा आदि विख्यात हैं।

लगभग 82 लाख हेक्टेयर भूमि पर कृषि की जाती है। कृषि योग्य भूमि के 71% भाग पर चावल 8% भाग पर जूट, 6% पर दालें, 1% पर गन्ना और अन्य 1% पर चाय उत्पन्न की जाती है।

देश में चावल की तीन फसलें अमन (शीतकालीन), ओस (पतझड़ीय) तथा बोरों (पीष्मकालीन) उत्पन्न की जाती हैं। आधे से अधिक चावल अमन फसल द्वारा उत्पन्न किया जाता है। 2014 में बंगलादेश में चावल का वार्षिक उत्पादन लगभग 523 लाख टन था।

इस देश की मुख्य व्यावसायिक फसल जूट है। यहाँ के किसान का एकमात्र साधन यही है। जूट की पैदावार नवीन जलोढ़ मिट्टी के क्षेत्रों में अधिक होती है। यह वे क्षेत्र हैं जहाँ प्रतिवर्ष बाढ़ द्वारा जलोढ़ मिट्टी एकत्रित होती है। जूट उत्पादन के लिए मैमनसिंह, रंगपुर, ढाका, फरीदपुर, तिपुरा, पावना और राजशाही नामक जिले विख्यात हैं। देश की अन्य व्यावसायिक फसलें गन्ना, तम्बाकू और चाय हैं। गन्ने की पैदावार देश के दक्षिण-पश्चिमी भाग में और चाय की पैदावार उत्तर-पूर्वी भाग में होती है।

बांग्लादेश की प्रमुख उपजे

(1) चावल-बांग्लादेश में चावल की खेती गंगा-ब्रह्मपुत्र के डेल्टाई भागों में की जाती है। यहाँ चावल का उत्पादन मुख्यतः देश के दक्षिणी भाग में उपजाऊ डेल्टाई भाग में होता है। चावल बांग्लादेश की मुख्य फसल है जो 50 प्रतिशत भूमि पर बोई जाती है। यह एशिया के कुल चावल का 12.5 प्रतिशत भाग उत्पन्न करता है। बांग्लादेश के सभी मैदानी इलाकों में चावल की कृषि होती है। चावल उत्पादन के मुख्य क्षेत्र खुलना, जैसोर, मेमनसिंह, बोरकारगंज, फरीदगंज, राजासाही हैं। 2014 में बांग्लादेश में 523 लाख मीट्रिक टन चावल का उत्पादन हुआ जो सम्पूर्ण विश्व का 7.06 प्रतिशत था ।

(2) गेहूं-बांग्लादेश में गेहूं मुख्य फसल नहीं है। बांग्लादेश के उत्तरी भाग में बहुत बोड़ी मात्रा में गेहूँ पैदा किया जाता है। बांग्लादेश में 2014 में गेहूँ का उत्पादन केवल 14 लाख मीट्रिक टन था जो सम्पूर्ण विश्व का 0.2 प्रतिशत था ।

(3) गन्ना-बांग्लादेश में गन्ने का मुख्य क्षेत्र गंगा, मेघना तथा पद्मा नदियों का मैदान के मुख्य क्षेत्र हैं। है। बांग्लादेश में दिनाजपुर, मेमनसिंह, ढाका, रंगपुर आदि गन्ना उत्पादन 014 में बांग्लादेश में 45 लाख मीट्रिक टन गन्ने का उत्पादन हुआ जो सम्पूर्ण विश्व का 0.24 प्रतिशत था।

(4) जूट या पटसन-बांग्लादेश विश्व में जूट या पटसन का दूसरा बड़ा उत्पादक देश है। 35 लाख हैक्टेयर भूमि पर यहाँ लगभग 90 लाख मीट्रिक टन जूट उत्पन्न किया जाता है। ब्रह्मपुत्र टी में मेमनसिंह तथा सिराजगंज, उत्तरी भाग तथा डेल्टाई भाग यहाँ के प्रमुख जूट उत्पादक क्षेत्र ।। जूट की सबसे अधिक पैदावार ब्रह्मपुत्र घाटी तथा गंगा-ब्रह्मपुत्र नदियों के निचले डेल्टाई भाग की जाती है। बांग्लादेश में जूट की उपज की अधिकता के मुख्य कारण अग्रलिखित हैं-

भूमि उपयोग बंगलादेश में बन के अन्तर्गत क्षेत्र कुल क्षेत्रफल का 14 प्रतिशत है। वन घटगाँव जिला एवं पहाड़ी क्षेत्र, दक्षिणी खुलना, उत्तरी व दक्षिणी सिलहट तथा ढाका व मैमनसिंह जिलों में पाये जाते हैं। अधिक वर्षा के क्षेत्रों में चपलास, तेलसुर और पितराज नामक सदाहरित वृक्ष तथा कम वर्षा के क्षेत्रों में गर्जन, तून और बाँस नामक पर्णपाती वृक्ष पाये जाते हैं। इस देश में वनों का महत्त्व डेल्टाई भागों में उल्लेखनीय है। यहाँ के वृक्ष सुन्दरी, गोरन, गैंग्वा आदि विख्यात हैं।

लगभग 82 लाख हेक्टेयर भूमि पर कृषि की जाती है। कृषि योग्य भूमि के 71% भाग पर चावल 8% भाग पर जूट, 6% पर दालें, 1% पर गन्ना और अन्य 1% पर चाय उत्पन्न की जाती है।

देश में चावल की तीन फसलें अमन (शीतकालीन), ओस (पतझड़ीय) तथा बोरों (पीष्मकालीन) उत्पन्न की जाती हैं। आधे से अधिक चावल अमन फसल द्वारा उत्पन्न किया जाता है। 2014 में बंगलादेश में चावल का वार्षिक उत्पादन लगभग 523 लाख टन था।

इस देश की मुख्य व्यावसायिक फसल जूट है। यहाँ के किसान का एकमात्र साधन यही है। जूट की पैदावार नवीन जलोढ़ मिट्टी के क्षेत्रों में अधिक होती है। यह वे क्षेत्र हैं जहाँ प्रतिवर्ष बाढ़ द्वारा जलोढ़ मिट्टी एकत्रित होती है। जूट उत्पादन के लिए मैमनसिंह, रंगपुर, ढाका, फरीदपुर, तिपुरा, पावना और राजशाही नामक जिले विख्यात हैं। देश की अन्य व्यावसायिक फसलें गन्ना, तम्बाकू और चाय हैं। गन्ने की पैदावार देश के दक्षिण-पश्चिमी भाग में और चाय की पैदावार उत्तर-पूर्वी भाग में होती है।

बांग्लादेश की प्रमुख उपजे

(1) चावल-बांग्लादेश में चावल की खेती गंगा-ब्रह्मपुत्र के डेल्टाई भागों में की जाती है। यहाँ चावल का उत्पादन मुख्यतः देश के दक्षिणी भाग में उपजाऊ डेल्टाई भाग में होता है। चावल बांग्लादेश की मुख्य फसल है जो 50 प्रतिशत भूमि पर बोई जाती है। यह एशिया के कुल चावल का 12.5 प्रतिशत भाग उत्पन्न करता है। बांग्लादेश के सभी मैदानी इलाकों में चावल की कृषि होती है। चावल उत्पादन के मुख्य क्षेत्र खुलना, जैसोर, मेमनसिंह, बोरकारगंज, फरीदगंज, राजासाही हैं। 2014 में बांग्लादेश में 523 लाख मीट्रिक टन चावल का उत्पादन हुआ जो सम्पूर्ण विश्व का 7.06 प्रतिशत था ।

(2) गेहूं-बांग्लादेश में गेहूं मुख्य फसल नहीं है। बांग्लादेश के उत्तरी भाग में बहुत बोड़ी मात्रा में गेहूँ पैदा किया जाता है। बांग्लादेश में 2014 में गेहूँ का उत्पादन केवल 14 लाख मीट्रिक टन था जो सम्पूर्ण विश्व का 0.2 प्रतिशत था ।

(3) गन्ना-बांग्लादेश में गन्ने का मुख्य क्षेत्र गंगा, मेघना तथा पद्मा नदियों का मैदान के मुख्य क्षेत्र हैं। है। बांग्लादेश में दिनाजपुर, मेमनसिंह, ढाका, रंगपुर आदि गन्ना उत्पादन 014 में बांग्लादेश में 45 लाख मीट्रिक टन गन्ने का उत्पादन हुआ जो सम्पूर्ण विश्व का 0.24 प्रतिशत था।

(4) जूट या पटसन-बांग्लादेश विश्व में जूट या पटसन का दूसरा बड़ा उत्पादक देश है। 35 लाख हैक्टेयर भूमि पर यहाँ लगभग 90 लाख मीट्रिक टन जूट उत्पन्न किया जाता है। ब्रह्मपुत्र टी में मेमनसिंह तथा सिराजगंज, उत्तरी भाग तथा डेल्टाई भाग यहाँ के प्रमुख जूट उत्पादक क्षेत्र ।। जूट की सबसे अधिक पैदावार ब्रह्मपुत्र घाटी तथा गंगा-ब्रह्मपुत्र नदियों के निचले डेल्टाई भाग की जाती है। बांग्लादेश में जूट की उपज की अधिकता के मुख्य कारण अग्रलिखित हैं-

बांग्लादेश भारत में कहां स्थित है?

बांग्लादेश भारत में पूर्व दिशा की और स्थित है

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