WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

संयुक्त राज्य अमेरिका के लोहा-इस्पात उद्योग पर निबन्ध लिखिए

संयुक्त राज्य अमेरिका, विश्व के औद्योगिक देशों में अग्रणी राष्ट्र है, यहाँ प्रायः सभी प्रकार के उद्योगों का विकास हुआ है। देश की लगभग 30 प्रतिशत जनसंख्या विभिन्न प्रकार के उद्योगों में कार्यरत है।

संयुक्त राज्य अमेरिका में पाए जाने वाले विभिन्न भौगोलिक तत्त्वों ने एकजुट होकर संयुक्त राज्य को विकसित बनाया है। यहाँ का धरातल, जलवायु, नदियाँ, मिट्टी, वनस्पति, खनिज इत्यादि का यहाँ के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान है। साथ ही वैज्ञानिकी एवं समय-समय पर होने वाले अनेक अनुसंधानों ने इस प्रदेश को एक धनी एवं अग्रणी देश बनाया है। प्रकृति प्रचुर प्राकृतिक सम्पदा प्रदान की है।

नवागन्तुक यूरोपियनों ने इस भूमि पर आकर अपूर्व साहस का परिचय दिया तथा इस देश की भूमि को बड़े अच्छे ढंग से उपयोग में लाने लगे। धीरे-धीरे इन लोगों ने लघु उद्योगों का विकास अपनी कम आवश्यकताओं के कारण किया। नवागन्तुकों के उपनिवेशों, आगमन एवं स्थायी निवासियों से शनैः शनैः जनसंख्या वृद्धि होती गई । परिणामस्वरूप उत्पादन का स्तर भी बढ़ता गया। माँग की अधिकता के कारण इस उत्पादन से पूर्ति संभव न थी अतः मशीनों का उपयोग किया जाने लगा।

मशीनी युग ने औद्योगिक जीवन में एक क्रांति ला दी। जलविद्युत एक सस्ती एवं सुलभ शक्ति थी, अतः शक्ति की समस्या को हल करने के लिए नदियों के तटों तथा प्रपातों के पास वाले नगरों एवं उपयुक्त स्थानों पर अनेक कारखाने स्थापित होने लगे। भाप के उपयोग ने और प्रगति दिखाई। धीरे-धीरे वृहत्तस्तरीय उद्योगों (Large Scale Industries) की स्थापना होने लगी। धीरे-धीरे यातायात के विभिन्न भागों का विकास होने लगा। आज तो औद्योगिक नगरों के साथ औद्योगिक क्षेत्रों का विकास हो चुका है ।

औद्योगिक विकास हेतु अनुकूल दशाएँ

वर्तमान में संयुक्त राज्य संसार का प्रमुख औद्योगिक राष्ट्र है। यहाँ पर अनेक प्रकार के उद्योग स्थापित हैं। किसी भी क्षेत्र में उद्योगों के केन्द्रित होने अथवा उनके विकास के लिए निम्न दशाओं का होना आवश्यक है-

(1) कच्चे माल की पर्याप्त सुलभ उपलब्धि, (2) शक्ति के पर्याप्त साधन, (3) अनुकूल जलवायु, (4) कुशल श्रमिक, (5) कुशल प्रबंधन, (6) परिवहन एवं यातायात की सुविधा, (7) पूँजी की पर्याप्तता, एवं (8) सरकारी नीतियाँ आदि

लौह-इस्पात उद्योग (Iron-Steel Industry)

लौह-इस्पात वर्तमान औद्योगिक एवं वैज्ञानिक युग का महत्त्वपूर्ण आधार है। इस युग को अगर इस्पात युग (Steel Age) कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी, क्योंकि कृषि, वन, खनन, मत्स्यपालन, निर्माण-वायुयान, जलयान, मोटर-गाड़ियाँ, रेलगाड़ियाँ, रेल-इंजन, रेल पटरियाँ, अन्य अनेक यंत्र एवं मशीनें लौह-इस्पात से ही बनाई जाती हैं। परिवहन एवं यातायात, जो स्वयं इसकी ही देन है, ने भी इस उद्योग के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की है ।

संयुक्त राज्य में इस उद्योग का प्रारंभ 16वीं शताब्दी में किया गया था। 1644 ई. में मेसाचुसेट्स राज्य के सलेम और बोस्टन नगरों में लौह-इस्पात उद्योग की स्थापना की गई। 17वीं शताब्दी में न्यूयार्क एवं न्यूजर्सी तथा पेन्सिलवेनिया राज्य में लौह-अयस्क का प्रचुर भण्डार मिला, इससे उद्योग को एक सहारा मिल गया। कच्चे माल, कुशल श्रमिकों एवं परिवहन तथा यातायात के साधनों के फलस्वरूप यह उद्योग इस देश का महत्त्वपूर्ण उद्योग बन गया और देश के विभिन्न भागों में स्थापित हो गया ।

लौह-इस्पात निर्माण

इस्पात बनाने के लिए सर्वप्रथम लोहे का शोधन किया जाता है । लौह-शोधन में लौह-अयस्क, चूना-पत्थर तथा कोकिंग कोयले की आवश्यकता पड़ती है। लौह-शोधन भापभट्टी (Blast Furnace) में किया जाता है। लौह-अयस्क, कोयला एवं चूने का अनुपात क्रमशः चार, दो एवं एक का होना चाहिए। शुद्ध लोहे को पिग आयरन कहते हैं।

इस लोहे से इस्पात भी बनाया जाता है। कच्चे लोहे में सिलिकॉन, फास्फोरस तथा कार्बन इत्यादि का अंश मिला रहता है जिससे लोहा चटक जाता है। इस्पात में लोहा और कार्बन का मिश्रण होता है। इस कार्बन इस्पात से मशीनें, मोटरगाड़ियाँ, वायुयान, कृषियंत्र तथा अनेक औजारों इत्यादि का निर्माण किया जाता है।

वर्तमान समय में लौह-इस्पात उद्योग इस देश का महत्त्वपूर्ण उद्योग है। इस उद्योग का वास्तविक विकास 19वीं शताब्दी में हुआ। संयुक्त राज्य के विभिन्न नगरों में यह उद्योग केन्द्रित है। इन नगरों में पिट्सबर्ग (पेन्सिलवेनिया), शिकागो (इण्डियाना), बर्मिंघम (अलबामा), गैरी (इलिनायस) इत्यादि प्रमुख औद्योगिक केन्द्र हैं। विभिन्न लौह-इस्पात केन्द्रों पर अनेक लघु एवं विशाल वस्तुओं का निर्माण किया जाता है ।

लौह-इस्पात उद्योग के केन्द्रीकरण के कारण

लौह-इस्पात उद्योग के स्थानीयकरण के निम्नलिखित कारण हैं— (1) कच्चे माल की उपलब्धता, (2) पर्याप्त ईंधन, (3) पर्याप्त कुशल श्रमिकों की उपलब्धता, (4) पर्याप्त पूँजी की उपलब्धता, (5) परिवहन एवं यातायात की सुविधा, (6) बाजार की समीपता, एवं (7) आधुनिकीकरण आदि ।

प्रमुख लौह-इस्पात क्षेत्र (Major Iron-Steel Region)

संसार के विकसित देशों में संयुक्त राज्य का नाम अग्रगण्य है। यहाँ का लौह-इस्पात उद्योग विकसित अवस्था में है। पूँजी एवं अन्य साधनों की पर्याप्तता तथा अनुकूलता के कारण लौह-इस्पात क्षेत्रों का वर्णन निम्न प्रकार है- संयुक्त राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में यह उद्योग स्थापित हो गया है। संयुक्त राज्य के प्रमुख लौह इस्पात क्षेत्र निम्न हैं-

1. पिट्सबर्ग-यंग्स्टाउन क्षेत्र—यह संयुक्त राज्य का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है जिसका विस्तार पिट्सबर्ग डिस्टिक्ट, यंगस्टाउन डिस्ट्रिक्ट, जॉन्सटाउन डिस्ट्रिक्ट, हवीनिंग डिस्ट्रिक्ट, स्ट्यूबेन विले डिस्ट्रिक्ट, मियामी व निम्न ओहियो घाटी क्षेत्रों पर है। इस क्षेत्र में औद्योगिक विकास के अग्र कारण हैं-

(i) लौह-अयस्क की प्राप्ति सुपीरियर झील क्षेत्र की मैसाबी, वर्मीलियन, सुयूना, मारक्वेट, गोमेविक इत्यादि खनन क्षेत्रों से हो जाती है।

(ii) आयात करने के लिए सुपीरियर झील क्षेत्र एक प्रमुख जलमार्ग सुविधा है।

(iii) उत्तम किस्म के कोयले की प्राप्ति अप्लैशियन कोयला क्षेत्र से हो जाती है।

(iv) चूने की प्राप्ति मिशिगन राज्य की अल्पना एवं कैलसाइट खानों से की जाती है ।

(v) बाजार की समीपता है व निर्मित माल की पर्याप्त माँग है।

(vi) मैंगनीज का भारत से आयात तथा अनुकूल व स्वास्थ्यप्रद जलवायु ।

(vii) माल के आयात व निर्यात हेतु उत्तम बंदरगाह की सुविधा ।

(viii) कुशल श्रमिकों की पर्याप्तता व नदियों से जल की प्राप्ति ।

संयुक्त राज्य के लौह-इस्पात का 35 प्रतिशत इस भाग में होता है। सुपीरियर झील क्षेत्र की खानें कच्चा माल प्रदान करती हैं। क्लीवलैण्ड बंदरगाह का रेल संबंध पिट्सबर्ग से है। इसी बंदरगाह से माल बाहर को निर्यात किया जाता है ।

2. शिकागो-गैरी क्षेत्र-शिकागो व गैरी नगर मिशीगन झील के दक्षिणी तट पर स्थित हैं । शिकागो नगर संयुक्त राज्य के ही नहीं बल्कि विश्व के बड़े औद्योगिक नगरों में से एक है। शिकागो प्रसिद्ध पशुवध केन्द्र के रूप में विश्वविख्यात है। शिकागो क्षेत्र देश का प्रमुख लौह उत्पादक क्षेत्र भी है। इस क्षेत्र में लौह-इस्पात उद्योग के विकसित होने के निम्नलिखित कारण हैं-

(i) सुपीरियर झील क्षेत्र की विभिन्न खानों से लौह-अयस्क की प्राप्ति ।

(ii) पेन्सिलवेनिया राज्य के कोयला क्षेत्र से कोयले की प्राप्ति ।

(iii) मिशिगन राज्य की अल्पना एवं कैल्साइट खानों से चूने की प्राप्ति ।

(iv) सघन जनसंख्या के फलस्वरूप कुशल श्रमिकों की सुगमता ।

(v) सस्ते परिवहन एवं यातायात की सुविधा ।

(vi) माल की खपत के लिए माँग की अधिकता तथा बाजार की समीपता ।

(vii) निर्मित माल मात्रा में अधिक तथा गुण में उत्तम ।

3.मध्य अटलांटिक क्षेत्र- लोहा-इस्पात औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार संयुक्त राज्य के पूर्वी अटलांटिक तटीय राज्यों के भू-भागों पर है। इसमें मेसाच्युसेट्स, कनेक्टीकट, न्यूजर्सी, मैरीलैण्ड, वर्जीनिया तथा पैन्सिलवेनिया राज्यों के लौह-इस्पात केन्द्रों को शामिल किया जाता है। इस क्षेत्र को लौह-अयस्क कार्नवाल, मारगनटाउन, एडिरन डैक क्षेत्रों से प्राप्त हो जाता है अधिकांश लौह-अयस्क वेनेजुएला तथा पीरू देशों से आयात कर लिया जाता है। कोयले की पूर्ति अप्लैशियन क्षेत्रों से होती है।

कोयले के अलावा नगरों से उत्पादित जलविद्युत का भी ईंधन एवं शक्ति के रूप में उपयोग किया जाता है। इस औद्योगिक क्षेत्र के विकास के निम्नलिखित कारण हैं-

(i) यूरोपीय देशों―स्पेन, स्वीडन के अलावा ब्राजील एवं क्यूबा से लौह-अयस्क का आयात

(ii) अप्लैशियन क्षेत्रों से कोयले की प्राप्ति ।

(iii) प्रपात पंक्ति में स्थित नगरों से विद्युतशक्ति की आपूर्ति ।

(iv) कुशल श्रमिकों की पूर्ति, निर्मित माल की माँग एवं बाजार की समीपता ।

(v) समुद्रतटीय स्थित होने के फलस्वरूप माल के आयात-निर्यात की सुविधा ।

4. अलबामा क्षेत्र – इस लोहा-इस्पात क्षेत्र का विस्तार अलबामा, टेनेसी, उत्तरी केरोलिना, दक्षिणी कैरोलिना, जार्जिया इत्यादि राज्यों के भू-भागों पर पाया जाता है। यहां का प्रमुख लौह-इस्पात उत्पादक केन्द्र बर्मिंघम है। प्रकृति का शुभ वरदान इस क्षेत्र को प्राप्त है क्योंकि लौह-अयस्क, कोयला एवं चूना इसी क्षेत्र से प्राप्त किया जाता है। न्यू आर्लियन्स, गाल्वेस्टन, मोबाइल, पैन्सोकोल इत्यादि

इस क्षेत्र के प्रमुख बन्दरगाह हैं। नीग्रो लोगों का उपयोग श्रमिकों के रूप में किया जाता है। इस क्षेत्र का बाजार विस्तृत है। इस क्षेत्र का प्रमुख औद्योगिक केन्द्र बर्मिंघम है। इसे ‘दक्षिण का पिट्सबर्ग’ कहते हैं। इस क्षेत्र के औद्योगिक विकास के कारण निम्नलिखित हैं-

(i) कच्चे माल (लौह-अयस्क, कोयला एवं चूना) की समीपवर्ती क्षेत्रों से प्राप्ति ।

(ii) कम्बरलैण्ड एवं अलेघनी पठार से भी कोयले की प्राप्ति ।

(iii) यातायात व परिवहन के साधनों की सुविधा ।

(iv) बाजार की समीपता, माँग की पर्याप्तता ।

(v) माँग से अधिक एवं गुण में अच्छे माल का उत्पादन ।

(vi) कुशल श्रमिकों (नीग्रो) की पर्याप्तता ।

(vii) निर्मित माल को भेजने के लिए गालवेस्टन, न्यू आर्लियन्स, मोबारल, पैन्साकोला, इत्यादि बंदरगाहों की सुविधा ।

5. पश्चिमी क्षेत्र—इस लौह-इस्पात क्षेत्र का विस्तार संयुक्त राज्य के पश्चिमी भागों में प्रशान्तरीय राज्यों के भू-भागों पर पाया जाता है। इन क्षेत्रों में वाशिंगटन, ओरेगन, कैलीफोर्निया, कोलोरेडो तथा व्योमिंग आदि राज्यों के औद्योगिक भू-भाग शामिल किए जाते हैं। पश्चिमी राज्यों के लिए कैलीफोर्निया की समतल घाटी अपना एक विशिष्ट महत्त्व रखती है। इस क्षेत्र के प्रमुख बन्दरगाह पोर्टलैण्ड, सेन फ्रांसिस्को तथा सैनडियागो आदि हैं। इस प्रदेश के औद्योगिक विकास के निम्नलिखित कारण हैं-

  • (i) कैलीफोर्निया के ईगल माउण्ट, नेवादा के जैक्सनक्रीक, भिनरल बेसिन, बकस्किन इत्यादि क्षेत्रों में लौह-अयस्क की प्राप्ति ।
  • (ii) पूर्वी राज्यों एवं कैलीफोर्निया से कोयले की प्राप्ति ।
  • (iii) विदेशों से लौह-अयस्क एवं मैंगनीज के आयात की सुविधा ।
  • (iv) चूने का आयात भारत, मिशिगन राज्य की अल्पना तथा कैल्साइट खदानों से किया जाता है।
  • (v) निर्मित माल की स्थानीय खपत एवं वैदेशिक बाजार की समीपता तथा वैदेशिक माँग की पर्याप्तता ।
  • (vi) जलमार्ग की सुविधा व निर्मित माल के लिए बंदरगाहों की सुविधा ।
  • (vii) थल मार्गों व उत्तम जलवायु की सुविधा ।

संयुक्त राष्ट्र के इस्पात केन्द्र का विशिष्टीकरण इस प्रकार है-

1. जलयान निर्माण-न्यूयार्क, फिलाडेल्फिया, बाल्टीमोर, न्यूपोर्ट एवं विलिंगटन आदि

2. मोटरें – क्लीवलैण्ड, फिलाडेल्फिया, डेट्रायट, इण्डियानापोलिस, कोर्न्सविले, न्यूयार्क, फ्लिट, लैसिग, पोण्टिएक, टोलेडो और बफैलो नगरों में है।

3. इंजिन तथा बिजली की मशीनें— न्यूयार्क, फिलाडेल्फिया, पिट्सबर्ग, शिकागो और मिलवाकी में ।

Leave a Comment